परुलिक चप्पल


-:परुलिक चप्पल:-

लेखिका: अरुण प्रभा पंत

राधिकाक इज हर साल गर्मिन में पहाड़ आपण गौं जानेरै भै, वैं बै मैतौक रैत खवै लै हैई जानेरै भै कुंछा।  जब बै राधिका और महेश ठुलदर्ज में गेयीं जानकीवल्लभ ज्यूल साल में चार म्हैण आपण नानतिन आपणै दगाड़ धर बेर पाईं सैंती।  उनैरि घरवायिक अर्थात राघिकाक इजौक नाम असल में 'पार्वती' भौय जो बिगड़बेर 'परुलि' हैगोय।

नानछिना बटिक वील कभै चप्पल नि पैरी भाय, पैल बार टिक चढी़ में उहूं लाल चमकदार चप्पल सौरास बै आय।   इतु संदर खुटन में कैसी पैरुं सोचबेर वील उनन कं आपण सिरान धर दी।  और नै ध्वे बेर रोज एक बार भितेर जै बेर उ उनन कं खुटन में हाल बेर देख खुश्शि है जानेर भै।  परूलि भली भलि देखणचाण गोरिफन्नार एक सोल बरसैकि चेलि भै, पर वीक अत्ती सिधपनाक कारण सब उथैं "परुलि भ्यास" कुनेर भ्या।

मंगसीर में उकं पिठ्या लाग और चार पैठ माघा म्हैण वीक ब्या भौय।  असल बात यो भै कि परुलिक बाब कं छुट्टी मिलै नै, फौज भाय बज्यूंण।  सौरासिनैल परुलिक गरहौ(ग्रह) और रंगरूपाक कारण झट्ट टिक चढै़ दे।  परुलिक इज बाबनैल सरकारि नौकर बर देख ब्या पक्क कर दी कुंछा।  आज जांलै पुर गौं में क्वे चेलिक टिक में चप्पल अइऐ नि भाय तबै परुलि कं भिसमांत (आश्चर्य) हैई भौय।  पैद हैयी बटिक आय तक वील कभै चप्पल पैरै नै।  घाम, चौमासहौ या तुष्यार सदा नागडै़ खुटैल हिटी भै।

परुलि हरुलि जीवंती, बैजंती, मालती, माया सबै बिन चप्पलै रुनेर भ्या, नौल धुर जंगौव, ख्यात सबै जाग नागडै़ खुटैल हिटनेर भ्या।  जैक पास चप्पल भाय लै, तो उलै- "छि अलज्याट हूं" कै बेर चप्पलन कं बांसपन खोसबेर समाय दिनेर भ्या।  जीवंतीक बोजि(भाभी) जब ब्या कर बेर ऐऔर वील भ्यार जाण हुं चप्पल पैरीं तो सबै वीक खुटन चै बेर खित्त चारी हंसनेर भ्या तो फिर वील लै आपण चप्पल समाय दिं के करछी "जैसा देश वैसा भेस"।

यो बात आजाक पहाडै़क न्हां, आज बै साठ सत्तर बरस पैल्लियैक भै हो।  खुटन चिर पडि़ रुनेर भ्या उनन में लिस (लीसा) भर बेर हिटाल पर चप्पल नै हौ राम भजौ,कभै नै।  आब परुलि कं तो मंसुब लाग ग्याय कि इतु संदर चप्पलन कं खुटन पैरण जै कैसि लागैलि हो।  आब जब परुलिक ब्या में सब सामान देखौ तो पुर गौं रणी गोय, ओइजा चमकन सुनाक जा रंगाक जो चप्पल आय उकं कैसी पैरनी समझै मै नि आय फिर जीवंतीक बोजि जो हल्द्वाणिक भै वील बताय- "एसि पैरनी इनन कं।"

सब चैई-च्य्यै रैग्याय, उनन पैर बेर "धुर बांस पुजन" जतु लंबी दिखीण लागि परुलि।  आब औरि जै अल्ज्याट है गोय परुलि कं पर वीक इजैल कौय- "चेली पैर ऐल सौरासौक सगुन हुं सब पैर जे जे ऐरौ।"  आब चाऔ धैं परुलि बिन चप्पलै हिटी नि सकैनि।  ज्वात लै पैरण भैटगे परुलि।  आब वीक खुट बिस्कुट जा और नौणि जा है ग्यान हो।

मौलिक, 
अरुण प्रभा पंत, नासिक, 09,01,2021

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