हिटौ हो सजन - कुमाऊँनी कविता

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-:हिटौ हो सजन:-

रचनाकार: हिमानी

हिटौ हो सजन!
कसै ठंड वण में
बांज क वोट तलि
इक छान (पर्णकुटी) बनूंनू
जिंदगी क् वां नईं गीत गानूं
उथै जिंदगी क
सच्च आनंद पानूं
हिटौ हो सजन...
यसि जाग जानूं
जां संसार क कड.बड. न होवो
जां जिंदगी क मधुर गान होवो
हिटौ हो सजन...
तुम वां द्यार क वोट तलि
बंशी बजाला
मैं नांचूंल तुमरि धुन पर
हिटौ हो सजन..
तुम बुरांस क फूल लि
करिया श्रृंगार म्योर
मैं वण-वण फिरूंल
तुमरि संग
हिटौ हो सजन...
मि सुंणूंल तुमर मिट्ठ बोल
और इच्छा अपणी सब
छोड़ि द्यूंल
और बसूंल भीतर अपण
तृप्ति क सागर
दुनियां क सबै बंधन
मि भूलि जूंल
दगड़ तुमर
अपण हिय में
अलौकिक झंकार ल्ही बेर
मि ले हिटूंल
दगड़ तुमर
वि डाना टुक में
जां रोजै मिलनी
धरती और अगाश
हिटौ हो सजन...

--हिमानी ©, 28-07-2020
-सर्वाधिकार सुरक्षित

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