जिम कार्बेट पार्काक् शेर - कुमाऊँनी शेर-शायरी

कुमाऊँनी भाषा में शेर-शायरी, ज्ञान पंत जी द्वारा  Kumauni Sher-Shayari by Gyan Pant, Kumaoni Shayari

जिम कार्बेट पार्काक् शेर......

रचनाकार: ज्ञान पंत

लड़ै लिजी 
जरुरी नि भै कि 
बन्दूक - तोप चलैयी जावौ 
 " टोप " धरी 
मनखी ले 
मार - काट मचूँनेर भये । 
..............
आपण  " बारी "
इंतजार में बैठी 
मनखी ....
खाँणौं - काव भै । 
..............
बोट 
लगालै त 
फल ले 
खालै । 
............
चाड़ - प्वाथन 
चा धैं ....
उज्याव हुन हुनै 
आफि है 
बुति - घांण में लागि जानीं ....
मनखी कैं 
आजि ले 
धत्यूँण पड़ौं । 
.................
भ्यार के चाँछै 
चिंणुक 
भतेर धरी छ  .... 
योयी लिजी 
आपण दिगा ले 
फसक - फराव  जरुरी छ।
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गिर्दा नाम पर

क्वे के ले कै सकों 
आज 
उनौर तिथी 'क  " सराद " छ 
उत्तराखंड में ......
मीटिंग - सीटिंग 
रैली - फैली हुनेर छन 
दम्मू - नङार ले 
बाजाल् बल ......
पंचतार् होटलन में 
सरकार 
फसक मारनेर छ ....
ठुल मैंस बलाल और 
सब नान सुणाँल 
कान लगै बेरि 
गिर्दा कैं .....
माव् पैरैयी जालि 
" ऐसी " हाल में 
दुन्नी भरीक गीत गोविन्द 
सुणैंयी जाल .....  
और फिर सब 
खै - पी बेरि बम-- बजाल 
एक तरफ .......
और दुहैरि तरफ 
नैनताल में 
गिर्दा 'क गीत चलि रयीं .....
एक दिन त आलो जैंता 
एक दिन त आल 
जदिन 
हमार पहाड़ है 
" खबीस " 
भ्यार निकयि जाल।

शब्दार्थ:
टोप धरी - उदास मना, 
खाँणौ काव - खदुवा, 
बुति घांण - कामधाम, 
धत्यूण - बुलाना,    
चिंणुक - चिंगारी, 
फसक फराव - बातचीत
सराद -  श्राद्ध, पुण्यतिथि, 
फसक - गोष्ठी,  
बम बजार - मस्ती

August 18, 22, 2017
...... ज्ञान पंत
ज्ञान पंत जी द्वारा फ़ेसबुक ग्रुप कुमाऊँनी से साभार

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